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Showing posts from April, 2023
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  बुद्ध धर्म के लोगोँ का मांसाहार खाना भगवान बुध्द का मार्ग कही भी अतिवादी नही है यह मध्यम मार्ग है मानव जीवन जीते हुए जीव हत्या न हो यह सम्भव ही नही है। कारण यह है कि अनाज के हर दाने में जीवन है। हर पौधे में जीवन है । पानी ,दूध ,दही सभी मे अति सूक्ष्म जीव हैं। वायु में भी अति सूक्ष्म जीवन है। अगर हम अतिवाद में जाये तो दो मिनट भी हमारा जीवन सम्भव नही है।  बौद्ध धम्म सभी प्राणियों पर करुणामयी हैं। परन्तु अतिवादी नही है। क्योंकि मानव जीवन ही जीवन चक्र से मुक्ति में सहायक है। अगर यही न रहा तो निर्वाण या मुक्ति सम्भव नही है।  इसी प्रकार भगवान बुध्द भोजन ग्रहण और दान दिए भोजन में भी अतिवादी नही हैं। इसी लिये उन्होंने त्रिकोटी परिशुद्ध ( न देखा, न सुना, न सन्देह हो ) ऐसे मांसाहारी भोजन और दान को इस देह से कार्य लेने के लिये निषेध नही किया है। भगवान बुध्द ने प्राणी हिंसा को हर जगह हतोत्साहित किया है। भगवान बुध्द ने देशना की जैसे मैं हूँ, वैसे ही वे हैं, और ' जैसे वे हैं, वैसा ही मैं हूं। इस प्रकार सबको अपने जैसा समझकर न किसी को मारे और न ही मारने के लिए प्रेरित करें। त्रिक...
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बुद्ध धर्म के लोगोँ का मांसाहार खाना.  बुद्ध धर्म के लोगोँ का मांसाहार खाना, क्या गौतम बुद्ध का अपमान करना नहीँ हैँ...? क्या महात्मा बुध्द की राह पर न चलना बुध्द का अपमान करना नहीँ हैँ ? क्या ये मुर्खता की पहचान नहीँ हैँ...? मै बचपन एक बुद्ध धर्मी मित्र के घर गया था, तब उसके घर मेँ सब लोग "अंगुलीमाल" नामक एक फिल्म देख रहे थे, मैँने भी देखी...! कथा के अनुसार, कुख्यात डाकु अंगुलीमाल जो इंसानो को मार कर उनकी अंगुलीया काट कर उनकी गलेँ मेँ माला पहनाता था । जब तथागत गौतम बुद्ध नेँ उसे कहा की, "पेड के दो पत्ते तोड लाओ" वह ले आया... उसके पत्ते तोड लाने पर गौतम बुध्द ने फिर कहा, "इन पत्तो को फिर से पेड पर जोड आवो" तब अंगुलीमाल बोला "यह कैसे संभव हैँ, भला तोडे हुये पत्ते वापस कैसे जोड सकता हुँ..." उसके बाद त. गौतम बुद्ध ने उसे उपदेश किया की "हेँ अंगुलीमाल ! तुम जोड नही सकते तो, तुम तोडते क्योँ हो...?" स्पष्ट है !  अर्थात 'तुम कीसी मृत प्राणी मेँ प्राण वापस नहीँ ला सकते तो उसे मारते क्यो हो'...? तब मै समझा की बुद्ध धर्म मेँ भी अहिँसा का ...
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Buddha-Vandana-बुद्ध-वंदना  बुद्ध वंदना (पालि में नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासमबुद्धस्स. नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासमबुद्धस्स. नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासमबुद्धस्स. तिसरण (त्रिशरण) बुद्धं सरणं गच्छामि. धम्मं सरणं गच्छामि. संघं सरणं गच्छामि. दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि. दुतियम्पि धम्मं सरणं गच्छामि. दुतियम्पि संघ सरणं गच्छामि. ततियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि. ततियम्पि धम्मं सरणं गच्छामि. ततियम्पि संघ सरणं गच्छामि. पंचसील (पंचशील) पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि. अदिन्नादाना वेरमणि सिक्खापदं समादियामि. कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि. मुसावादा वेरमणि सिक्खापदं समादियामि. सुरामेरयमज्जपमादट्ठाना वेरमणि सिक्खापदं समादियामि. भवतु सब्ब मङ्गलं! साधु! साधु! साधु! बुद्ध वंदना (हिंदी में) मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमस्कार करता हूँ. मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमस्कार करता हूँ. मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमस्कार करता हूँ. त्रिशरण मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ. मैं धम्म की शरण जाता हूँ. मैं संघ की शरण जाता हूँ. दूसरी बार मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ. दूसरी बार मैं धम्म ...